Sunday, 28 September 2014

लोग पूछेंगे

लोग पूछेंगे क्यों  उदास हो तुम
और जो दिल में आए सो कहियो

"
यूँ ही माहौल की गिरानी है
दिन ख़िज़ाँ के ज़रा उदास-से हैं
कितने बोझिल हैं शाम के साए"

उनकी बाबत ख़मोश ही रहियो
नाम उनका ना दरमियाँ आए

नाम उनका ना दरमियाँ आए
उनकी बाबत ख़मोश ही रहियो

"
कितने बोझिल हैं शाम के साए
दिन ख़िज़ाँ के ज़रा उदास-से हैं
यूँ ही माहौल की गिरानी है"

और जो दिल में आए सो कहियो
लोग पूछेंगे क्यों  उदास हो तुम?

(~
१९४८)

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