लोग
पूछेंगे क्यों
उदास हो तुम
और जो दिल में आए सो कहियो
"यूँ ही माहौल की गिरानी है
दिन ख़िज़ाँ के ज़रा उदास-से हैं
कितने बोझिल हैं शाम के साए"
उनकी बाबत ख़मोश ही रहियो
नाम उनका ना दरमियाँ आए
नाम उनका ना दरमियाँ आए
उनकी बाबत ख़मोश ही रहियो
"कितने बोझिल हैं शाम के साए
दिन ख़िज़ाँ के ज़रा उदास-से हैं
यूँ ही माहौल की गिरानी है"
और जो दिल में आए सो कहियो
लोग पूछेंगे क्यों उदास हो तुम?
(~१९४८)
और जो दिल में आए सो कहियो
"यूँ ही माहौल की गिरानी है
दिन ख़िज़ाँ के ज़रा उदास-से हैं
कितने बोझिल हैं शाम के साए"
उनकी बाबत ख़मोश ही रहियो
नाम उनका ना दरमियाँ आए
नाम उनका ना दरमियाँ आए
उनकी बाबत ख़मोश ही रहियो
"कितने बोझिल हैं शाम के साए
दिन ख़िज़ाँ के ज़रा उदास-से हैं
यूँ ही माहौल की गिरानी है"
और जो दिल में आए सो कहियो
लोग पूछेंगे क्यों उदास हो तुम?
(~१९४८)

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